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मंगलवार, 7 जनवरी 2014

chhand salila: Sujan chhand -sanjiv


छंद सलिला:
सुजान छंद

संजीव
*
(अब तक प्रस्तुत छंद: अग्र, अचल, अचल धृति, आर्द्रा, आल्हा, इंद्रा वज्रा, उपेन्द्र वज्रा, कीर्ति, घनाक्षरी, प्रेमा, वाणी, शक्तिपूजा, सार, माला, शाला, हंसी,
दोधक)

सुजान २ पंक्तियों का मात्रिक छंद है. इस छंद में हर पंक्ति में १४ तथा ९ मात्राओं पर यति तथा गुरु लघु पदांत का विधान है.

चौदह-नौ यति रख रचें, कविगण छंद सुजान 
हो पदांत गुरु-लघु 'सलिल', रचना रस की खान

उदाहरण:
१. चौदह-नौ पर यति सूजन, में 'सलिल' न भूल।
   गुरु-लघु से पद अंत करे, तो महके फूल।।

२. दर न मुझको किसी का भी, है दयालु ईश।
   देश हित है 'सलिल' सस्ता, दे देना शीश।।
३. कोयल कूके बागों में, पनघट में शोर।
   मौर खिले अमराई में, खेतों में भोर।। 
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facebook: sahiyta salila / sanjiv verma 'salil'

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